ERP लें या कस्टम सॉफ्टवेयर: आपके बिज़नेस के लिए क्या सही है?
तैयार ERP तब लीजिए जब आपकी प्रक्रिया आम हो और आपको कुछ हफ़्तों में चालू होना हो। कस्टम तब, जब आपका काम करने का तरीका ही आपकी ताकत हो और उसे टेम्पलेट में डालने से वह ताकत खत्म हो जाए।
असली फ़र्क क्या है
तैयार ERP किसी उद्योग के लिए बना होता है और आपके लिए सेट किया जाता है। कस्टम सिस्टम आपके काम करने के तरीके के हिसाब से डिज़ाइन होता है।
समझौता साफ़ है। तैयार सस्ता और तेज़ है पर आपसे बदलने को कहता है। कस्टम महँगा है और समय लेता है पर ठीक बैठता है।
आमने-सामने
| तैयार ERP | कस्टम सॉफ्टवेयर | |
|---|---|---|
| चालू होने में समय | 2 – 8 हफ़्ते | 2 – 6 महीने |
| शुरुआती खर्च | कम | ज़्यादा |
| आपकी प्रक्रिया से मेल | आपको बदलना होगा | यह आपके हिसाब से बनेगा |
| आगे बदलाव | प्रोडक्ट की सीमा तक | जो चाहिए वह |
| कब सही है | प्रक्रिया आम हो | प्रक्रिया ही आपकी ताकत हो |
तैयार ERP कब सही है
- आपका काम आपके उद्योग के बाकी लोगों जैसा ही है
- आपको जल्दी चालू होना है, अगले साल नहीं
- बजट की सख्त सीमा है
- आपको अभी पक्का पता नहीं कि क्या चाहिए, और चलते सिस्टम से सीखना चाहते हैं
कस्टम कब अपनी कीमत वसूल करता है
- आपका तरीका सचमुच अलग है और ग्राहक इसीलिए आपको चुनते हैं
- आपने तैयार सॉफ्टवेयर आज़माकर छोड़ दिया है
- ऐसी मशीन या सिस्टम से जुड़ाव चाहिए जो कोई प्रोडक्ट सपोर्ट नहीं करता
- आप कुछ ऐसा बना रहे हैं जिसे आगे बेचना या लाइसेंस देना है
बीच का रास्ता, जो ज़्यादातर लोग अपनाते हैं
व्यवहार में जवाब आमतौर पर बीच का होता है। आम हिस्सों — अकाउंट्स, स्टॉक, बिलिंग — के लिए इंडस्ट्री सिस्टम लीजिए, और कस्टम मॉड्यूल सिर्फ़ वहाँ बनवाइए जहाँ आपकी प्रक्रिया सचमुच अलग है।
इससे खर्च तैयार सिस्टम के आसपास रहता है और आपके काम का जो हिस्सा वाकई खास है वह सुरक्षित रहता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या हम तैयार से शुरू करके बाद में कस्टम पर जा सकते हैं?
हाँ, और यह समझदारी भरा क्रम है। एक साल तैयार सिस्टम चलाने से ठीक-ठीक पता चल जाता है कि क्या फ़िट नहीं बैठता, जिससे कस्टम का ब्रीफ़ कहीं बेहतर बनता है। बस डेटा एक्सपोर्ट का अधिकार शुरू में ही तय कर लीजिए।
क्या कस्टम सॉफ्टवेयर मेंटेन करना मुश्किल होता है?
सिर्फ़ तब, जब वह खराब तरीके से बना हो या बनाने वाला गायब हो जाए। ठीक से बना, डॉक्यूमेंटेशन वाला कस्टम सॉफ्टवेयर, जिसके पीछे इन-हाउस टीम हो, किसी प्रोडक्ट से ज़्यादा मुश्किल नहीं होता — और आपको अपने ज़रूरी बदलाव के लिए किसी कंपनी के रोडमैप का इंतज़ार नहीं करना पड़ता।
ओपन-सोर्स ERP के बारे में क्या कहेंगे?
ओपन-सोर्स से लाइसेंस फ़ीस बचती है, लागू करने का खर्च नहीं — और बड़ा खर्च वही होता है। ये उन बिज़नेस के लिए ठीक हैं जिनके पास अपनी तकनीकी टीम हो। वरना पार्टनर को तो देना ही है, इसलिए लाइसेंस की जगह कुल खर्च की तुलना कीजिए।